Monday, 1 September 2014

#मर्दानी- Women empowerment के नाम पर आजकल वाहवाही लूट रही यह फ़िल्म पुरूष प्रधान समाज का विभत्स रूप व महिलाओं को उनकी शक्ति का आभास कराने के प्रयास में सफल रही। परन्तु यह भी एक विचित्र विडम्बना है कि महिलाओं की शक्ति का नामांकन करने के लिए आज भी #मर्दानी शब्द पुरूषों से उधार लेना पड़ रहा है!!आज के समय में जब महिला पुरूषों को हर क्षेत्र में चुनौती दे रही है तब भी आज तक उसकी शक्ति को नया नाम नहीं दिया जा सका!!साहस,वीरता और निडरता के लिए क्या सदैव #मर्दानगी शब्द ही प्रयोग होता रहेगा,वो भी महिला सशक्तिकरण के लिए!!!उससे भी ज़्यादा दुःखद है आज भा #जनानी शब्द का उपयोग!!जो कि इसके कायरता आदि के लिए प्रयोग हो रहा है। वो दौर और था जब कोई स्त्री समाजिक बंधनों को तोड़ कर रानी लक्ष्मीबाई बनी और कहा गया "ख़ूब लड़ी #मर्दानी"!! समय बदल गया है,मान्यताएँ भी बदलनी होंगी।

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