Sunday, 18 May 2014

मित्रों ,
मैं अपनी शीघ्र प्रकाशित होने वाली पुस्तक "महंत -द गॉडफादर" के अंश अपने ब्लॉग व फेसबुक पर प्रस्तुत कर रहा हुँ,आशा है आप सबका स्नेह सदा की भांति हमें प्राप्त होगा।
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ष् फिर हिन्दू एकता के नाम पर अपने राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति करना! यही तुम लोगों का ध्येय है। परन्तु गया प्रसाद एक बात मेरी भी सुन लो। अभी तक मैंने यह विचार बनाया था कि मैं किसी प्रकार के राजनैतिक विवाद में नहीं पडूँगा। परन्तु तुम्हारी बातों और तुम्हारे दल की विचारधारा ने मुझे बाध्य कर दिया है कि मैं सक्रिय होकर धर्म और जाति पर आधारित राजनीति का विरोध करूँ। तुम जैसे लोगों के निजी स्वार्थ से अब यह प्रतीत होने लगा है कि तुम लोग अब धर्म गुरूओं का कार्य करने की चेष्टा कर रहे हो, वो भी निम्न स्तर पर जाकर। धर्म की रक्षा करने वाले लोग राजनीति में रूचि लेकर धर्म को अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की सीढ़ी के रूप में प्रयोग करना चाह रहे हैं। किन्तु मैं अपने स्तर पर इस धर्म और राजनीति के गठजोड़, जो स्वार्थ पर आधारित है, उसका पुरजोर विरोध करूँगा। मैंने विचार बनाया था कि मैं पुरी में होने वाले “विश्व धर्म संसद“ में स्वयं भाग न लेकर अपने प्रतिनिधि को भेजूँगा।“
यह कहकर महराज गोपालदास स्वामी ने एक दृष्टि कमलेश पर डाली। फिर गृहमंत्री गया प्रसाद की ओर दृष्टि करके बोले-
“परन्तु अब मैं स्वयं “विश्व धर्म संसद“ में जाकर धर्म के राजनीतिकरण का विरोध करूंगा। यदि आवश्यक हुआ तो राजनीति विरोधी महंतों, मठाधीशों, धर्माचार्यों और शंकराचार्यों को एक मंच पर लाने का प्रयास करूँगा। धर्म की रक्षा के नाम पर धर्म का राजनैतिक दुरूपयोग रोकना ही अब मेरे जीवन का लक्ष्य है।“

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